राजस्थान में सतत कृषि पद्धतियाँ और कृषि विकासः एक विश्लेषणात्मक अध्ययन
Author : राम खिलाड़ी मीना और अनिता मीना
Abstract :
अध्ययन का उद्देश्य राजस्थान में सतत कृषि पद्धतियों के स्वरूप और विकास का आकलन करना तथा सतत कृषि पद्धतियों की संभावनाओं और चुनौतियों का पता लगाना है। इस अध्ययन में 2003-04 से 2022-23 तक की अवधि के लिये चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) की गणना के लिए सेमी लॉग लीनियर रिग्रेशन मॉडल का उपयोग किया गया हैं। अध्ययन के निष्कर्षों से पता चला है कि अध्ययन अवधि के दौरान गैर-खाद्य और बागवानी फसलों, में फसल क्षेत्र में समग्र वृद्धि पाई गई है, जो विविधीकरण को दर्शाता है। क्षेत्रफल के हिसाब से खाद्य फ़सलें सबसे बड़ा घटक बनी रहीं। खाद्य फसलों के उत्पादन में साल-दर-साल व्यापक उतार-चढ़ाव पाया गया है। गैर-खाद्य फसलों के उत्पादन में स्थिर और अधिक निरंतर वृद्धि पाई गई है। बागवानी फसलों के उत्पादन में धीरे-धीरे वृद्धि देखी गई, जिसमें 2010-11 के बाद उल्लेखनीय तेजी तथा 2015-16 और 2016-17 के दौरान इसमें तीव्र वृद्धि पाई गई। अध्ययन अवधि के दौरान, राजस्थान में बागवानी फसलों ने खाद्य और गैर-खाद्य फसलों की तुलना में मजबूत और सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण दीर्घकालिक वृद्धि दर्ज की है। जैविक उत्पादन में उल्लेखनीय रूप से मजबूत और अधिक स्थिर वृद्धि पाई गई है। उत्पादन के लिए उच्च निर्धारण गुणांक इस वृद्धि की प्रबलता को रेखांकित करता है जो दर्शाता है कि बढ़ते उत्पादन आंकड़े समय के साथ दीर्घकालिक प्रगति के अनुरूप हैं। इसके विपरीत, क्षेत्रफल के लिए कम R² मान प्रमाणित हेक्टेयर में वर्ष-दर-वर्ष अधिक परिवर्तनशीलता को दर्शाता है I
Keywords :
सतत कृषि पद्धति, जैविक उत्पादन, फसल विविधीकरण, कृषि विकास I